वक्फ संशोधन विधेयक: उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स की प्रतिक्रिया आई सामने

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून काजमी ने संसद में पेश किए जाने वाले वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने सिस्टम में मनमानी फेरबदल की और मुस्लिम समुदाय को महज वोट बैंक बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक हथकंडे अपनाए।
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इसे ‘उम्मीद’ का नाम दिया है, यह बताते हुए कि गरीब मुस्लिम समुदाय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी अपेक्षाएँ हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को इस बदलाव की ‘उम्मीद की किरण’ करार दिया और कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि वे गरीब मुसलमानों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ेंगे।
शम्स ने इसे ’70 साल बनाम मोदी कार्यकाल’ की तुलना करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सात दशक थे, लेकिन उन्होंने वक्फ संपत्तियों का दोहन किया और गरीबों के अधिकारों का हनन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमीरों ने गरीब मुसलमानों के अधिकार छीने और अब डर फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि मस्जिदें छीन ली जाएंगी।
शम्स ने दावा किया कि जो लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वे असल में मुसलमान नहीं, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और जनता दल से जुड़े ‘राजनीतिक मुसलमान’ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इनके पीछे जमीयत उलेमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठन हैं, जिनका असली मकसद वक्फ संपत्तियों से लाभ उठाना और राज्यसभा की सीट हासिल करना है।
शादाब शम्स ने कहा कि कुछ लोगों को डर सता रहा है क्योंकि जो संपत्तियाँ अब तक अमीरों के कब्जे में थीं, वे उनसे वापस ली जा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चिंता उन्हीं को है जिन्होंने वक्फ संपत्तियों का फायदा उठाया, जबकि गरीब मुसलमानों के हक से उन्हें वंचित रखा गया। शम्स ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कराकर गरीब मुस्लिम समुदाय को उनका जायज हक दिलाएंगे।